Wednesday, October 21, 2009

ख्वाबों की दुनिया में रहता हूँ, जहाँ के सवालों से अनजान हूँ , 
हवा में आशिआं मेरा, ज़मीन से उडी ख़ाक हूँ . 
न किताब, न काबा , इन जवाबों का सवाल हूँ, 
खुदी की तलाश में हूँ - राही मैं इक बेराह हूँ .

Saturday, July 18, 2009

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ज़रुरत ही हर रिश्ते की बुनियाद है
इंसान है पायदान, पता नहीं इसे किस की तलाश है
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खुदगर्ज़ है ये कौन, तेरी नज़रों के अक्स में?
के चेहरा ये! आएने में कहीं देखा सा है कहीं

माना जान देता है कौन, आखिर इश्क में?
मगर ये मोहबात कैसी ! की ख़ुशी-ऐ-यार में भी ऐतराज़ कहीं

Monday, November 29, 2004

Ashiqee

इश्क-आशिकी बातें हैं निकुमों-नाकारों की,
चलो हम तुम्हारा ये इल्जाम भी सह लें गे ,
तोहमतें तुम लगाओ चाहे हज़ार -
दामन-इ-यार न हम फिर भी छोड़े गे.

Thursday, November 25, 2004

ZINDAGI

उलझी पहेली ये ज़िन्दगी -
सुलझाने की फुर्सत है किसे ,
बेवफा की नाकाम-ऐ-मोहब्बत -
आज़माने की फुर्सत है किसे ,
मह के संग में ,मस्त-ऐ-जन्नत के आलम में हूँ यार मेरे ,
महखाने के दर -बाहर दर्द हो या दोजख ,
फिलहाल इस ख़याल की फुर्सत है किसे .