Monday, November 29, 2004

Ashiqee

इश्क-आशिकी बातें हैं निकुमों-नाकारों की,
चलो हम तुम्हारा ये इल्जाम भी सह लें गे ,
तोहमतें तुम लगाओ चाहे हज़ार -
दामन-इ-यार न हम फिर भी छोड़े गे.