ख्वाबों की दुनिया में रहता हूँ, जहाँ के सवालों से अनजान हूँ ,
हवा में आशिआं मेरा, ज़मीन से उडी ख़ाक हूँ .
न किताब, न काबा , इन जवाबों का सवाल हूँ,
खुदी की तलाश में हूँ - राही मैं इक बेराह हूँ .
ज़रुरत ही हर रिश्ते की बुनियाद है
इंसान है पायदान, पता नहीं इसे किस की तलाश है
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खुदगर्ज़ है ये कौन, तेरी नज़रों के अक्स में?
के चेहरा ये! आएने में कहीं देखा सा है कहीं
माना जान देता है कौन, आखिर इश्क में?
मगर ये मोहबात कैसी ! की ख़ुशी-ऐ-यार में भी ऐतराज़ कहीं